मांगलिक दोष क्या है? कुंडली में मंगल दोष कैसे देखें

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इस लेख में
  1. कुंडली में मंगल दोष कैसे देखें
  2. इन छह भावों में मंगल क्यों?
  3. उच्च, निम्न और आंशिक मांगलिक
  4. मांगलिक दोष कब भंग होता है
  5. मांगलिक दोष कितना आम है?
  6. कुंडली मिलान में मंगल दोष
  7. मंगल दोष के उपाय

मांगलिक दोष (मंगल दोष या कुज दोष) कुंडली मिलान का एक पारंपरिक नियम है। जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो, तो उस व्यक्ति को मांगलिक कहा जाता है। मंगल ऊर्जा, क्रोध और संघर्ष का ग्रह है, और ये भाव स्वयं, परिवार, घर, जीवनसाथी और आयु से जुड़े हैं। इसलिए विवाह से पहले परिवार इसकी जांच करते हैं।

कुंडली में मंगल दोष कैसे देखें

इसके लिए जन्म तिथि, समय और स्थान से बनी जन्म कुंडली चाहिए। फिर:

  1. लग्न (पहला भाव) पहचानें। उत्तर भारतीय कुंडली में ऊपर बीच वाला खाना पहला भाव होता है।
  2. मंगल (मं) को ढूंढें।
  3. लग्न से मंगल तक भाव गिनें, लग्न को 1 मानकर।
  4. अगर मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में है, तो कुंडली लग्न से मांगलिक है।
  5. यही गिनती चंद्र राशि से भी करें। उत्तर भारत में कई ज्योतिषी दोनों तरह से देखते हैं।

सबसे आसान तरीका है मुफ़्त कुंडली बनाना। उसमें लग्न और चंद्रमा, दोनों से मांगलिक दोष की जांच दिखती है।

इन छह भावों में मंगल क्यों?

भाव जीवन का क्षेत्र पारंपरिक चिंता
पहला स्वभाव, शरीर गुस्सा, हावी होना
दूसरा परिवार, वाणी कड़वी बात, परिवार में तनाव
चौथा घर, मन की शांति घर में अशांति
सातवां जीवनसाथी पति-पत्नी में झगड़े
आठवां आयु, अचानक घटनाएं पुराने ग्रंथों में सबसे गंभीर
बारहवां शयन सुख, खर्च दूरी, नुकसान

दक्षिण भारत की कुछ परंपराएं पहले भाव को नहीं गिनतीं। इसलिए एक ही कुंडली पर दो ज्योतिषियों की राय अलग हो सकती है।

उच्च, निम्न और आंशिक मांगलिक

मांगलिक दोष कब भंग होता है

ग्रंथों में कई अपवाद (परिहार) बताए गए हैं। सबसे आम:

  1. दोनों मांगलिक हों। यह सबसे ज़्यादा माना जाने वाला नियम है, दोनों के दोष एक-दूसरे को काट देते हैं।
  2. मंगल अपनी राशि (मेष या वृश्चिक) में हो या उच्च (मकर) का हो।
  3. गुरु या शुक्र लग्न या सातवें भाव में हों, या गुरु की दृष्टि मंगल पर हो।
  4. साथी की कुंडली में शनि, राहु या केतु उसी दोष वाले भाव में हों।
  5. गुण मिलान अच्छा हो और नाड़ी या भकूट दोष न हो। देखें कितने गुण मिलने चाहिए।

मांगलिक दोष कितना आम है?

मंगल 12 में से 6 भावों में हो तो दोष माना जाता है, इसलिए सिर्फ़ लग्न से देखने पर भी लगभग 40 से 50 प्रतिशत लोग मांगलिक होते हैं। जो बात आधी आबादी पर लागू हो, वह अकेले किसी विवाह के दुखी होने का कारण नहीं हो सकती। इसीलिए समझदार ज्योतिषी भंग के नियम, सातवां भाव, शुक्र और पूरा मिलान देखकर ही राय देते हैं।

कुंडली मिलान में मंगल दोष

जब आप जन्म विवरण से कुंडली मिलान करते हैं, तो हमारा टूल 36 गुणों के साथ यह भी दिखाता है कि कौन मांगलिक है। सिर्फ़ नाम से मिलान में मंगल दोष नहीं देखा जा सकता, क्योंकि इसके लिए जन्म के समय मंगल की स्थिति चाहिए।

मंगल दोष के उपाय

पारंपरिक उपायों में हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार का व्रत, “ॐ अं अंगारकाय नमः” मंत्र का जाप, मसूर दाल का दान और कुछ समुदायों में कुंभ विवाह शामिल हैं। ये आस्था की बातें हैं। कोई उपाय अनिवार्य नहीं है। अगर कोई कहे कि मंगल दोष के कारण विवाह असफल ही होगा, तो दूसरी राय लें और पूरी कुंडली देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मांगलिक दोष कैसे पता करें?

अपनी कुंडली में देखें कि मंगल लग्न से किस भाव में है। अगर मंगल 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में है, तो कुंडली मांगलिक मानी जाती है। कई ज्योतिषी चंद्रमा से भी गिनती करते हैं। हमारी मुफ़्त कुंडली दोनों तरह से जांच करती है।

क्या 28 साल के बाद मांगलिक दोष खत्म हो जाता है?

एक लोक मान्यता है कि 28 साल की उम्र के बाद मंगल का असर कम हो जाता है। यह शास्त्रीय नियम नहीं है। दोष कुंडली में रहता है, लेकिन कई ज्योतिषी 28 के बाद होने वाले विवाह में इसे कम महत्व देते हैं।

क्या मांगलिक और गैर-मांगलिक की शादी हो सकती है?

परंपरा में मांगलिक का विवाह मांगलिक से कराया जाता है। लेकिन अगर दोष भंग हो, हल्का हो या बाकी मिलान अच्छा हो, तो कई ज्योतिषी ऐसे विवाह की अनुमति देते हैं।

मंगल दोष के उपाय क्या हैं?

हनुमान चालीसा का पाठ, मंगलवार का व्रत, 'ॐ अं अंगारकाय नमः' मंत्र का जाप और मसूर दाल का दान पारंपरिक उपाय हैं। कोई भी उपाय ज़रूरी नहीं है, और डर में आकर महंगी पूजा न कराएं।

ज्योतिष एक पारंपरिक मान्यता है। यह लेख केवल सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन के लिए है, चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं।